ये पाँच आदतें बुरा असर डालती है आपके मानसिक स्वास्थ पर

 

हर दिन चली आ रही दिनचर्या मे हम ना चाहते हुए भी कुछ बेकार की आदतों को अपना लेते है, हालाकी ये आदतें हमारे जीवन मे इस तरह से घूली मिली हुई है की हम इन पर कभी ध्यान ही नही देते। ये आदतें को देखकर लगता है की हमे इससे कुछ नुकसान नही होने वाला पर अगर ध्यान नही दिया गया तो ये हमारे शरीरिक व मानसिक स्वास्थ को नुकसान पहुचाता है। तो चलिए जानते है कौन सी है ये आदते जो आपके मानसिक स्वास्थ के हानिकारक हो सकते है।

हर दिन चली आ रही दिनचर्या मे हम ना चाहते हुए भी कुछ बेकार की आदतों को अपना लेते है, हालाकी ये आदतें हमारे जीवन मे इस तरह से घूली मिली हुई है की हम इन पर कभी ध्यान ही नही देते। ये आदतें को देखकर लगता है की हमे इससे कुछ नुकसान नही होने वाला पर अगर ध्यान नही दिया गया तो ये हमारे शरीरिक व मानसिक स्वास्थ को  नुकसान पहुचाता है। तो चलिए जानते है कौन सी है ये आदते जो आपके मानसिक स्वास्थ के हानिकारक हो सकते है।

झुककर चलना

जब आप आराम से और झुककर चलते है तो यह आपको कमजोर व थका हूआ दिखाता है। कंधो को झुकाकर चलने से हमारे मन मे नकारात्मक विचार आते है। जर्नल ऑफ बिहेवियर थेरेपी और एक्सपेरिमेंटल सायाकाइट्रिस के अध्यन के अनुसार जब कुछ व्यक्तियों पर रिसर्च किया गया और उन्हे झुककर आराम से धीमी रफ़तार मे चलने के लिए कहा गया तो उनका मूड ज्यादा खराब पाया गया। तेज रफ्तार से चलने पर हमारे अंदर सकारात्मकता का वास होता है।

हमेशा तस्वीरे लेते रहना ( फोटोस क्लिक करना )

अगर आप कही घूमने जाते है और दिन भर सिर्फ फोटोस ही क्लिक करते रहते है तो यह आपके लिए थोड़ा निरासाजनक हो सकता है। किसी स्थान पर जाना और वहाँ की खूबसूरती को महसूस करना ज्यादा बेहतर होता है। साइक्लोजिकल साइंस मे हूए रिसर्च मे पाया गया की जो लोगो घूमने की वजाय फोटोस खीचने मे व्यस्त थे वे वहाँ के बारे मे ज्यादा कुछ जान ही नही पाए। जब उनसे पूछा गया की क्या देखा तो पाया गया की वे घूमते समय कैसे दिख रहे थे इस पर उनका ज्यादा ध्यान था।

सुस्त दिनचर्या

जीवन को एक्टिव बनाने के लिए जरूरी नही है की आप हर रोज कड़ी मेहनत करे या लंबी सैर पर जाए। दिन की छोटी-छोटी एक्सरसाइज जैसे सीढ़िया चढ़ना या कोई भी एसी गतीविधी जिसके कारण आपका शरीर एक्टिव रहे ये दिमाग के अच्छा है इससे आप डिप्रेशन के शिकार नही होंगे। जामा सायाकाइट्रिस मे हुए रिसर्च के अनुसार सप्ताह मे कम से कम तीन दिन एक्टिव रहने से डिप्रेशन की संभावना 19% तक कम हो जाती है।

काम टालना

अगर आपको कोई काम दिया गया है और आप उसे ईसलिए नही करना चाहते क्योकी आपके लिए वो नामुमकिन है या वह आपके लिए उबाऊ है तो ठीक है। पर अगर आप उस काम को इसलिए नही करना चाहते क्योकी आपको डर है की कही असफल हुए तो या यह काम करना थोड़ा मुसकिल है तो ये सब दिमाकी समस्या है। इन सब से निकलने का उपाय करना चाहिए

खुद को समय दें

हर समय ऑफिस के काम मे या एक अच्छे व्यक्ती की तरह जिम्मेदारियों मे लगे रहते है तो अपने लिए कुछ समय निकाले। क्योकी हो सकता है इन जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते आपके पास समय ही ना बचे। तनाव से बचाने के लिए जरूरी है खूद को समय देना इसलिए अपने लिए थोड़ा वक्त जरूर निकाले। जब आप खूद को ही समय नही देते तो अंदर ही अंदर चिड्चिड़ाहट बढ़ाने लगती है। इसलिए इन 24 घंटो मे एक घंटे न सही 15 से 20 मिनट जरूर निकाले।

source of article is danik bhaskar

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