मलाला युसुफजई सबसे कम उम्र की नोबेल विजेता

Malala yousafzai दुनियॉ के सबसे कम उम्र की नोबेल विजेता

मलाला युसुफजई सबसे कम उम्र की नोबेल बिजेता और हिम्मत की मिसाल है। अपने जज्बे के दम पर आंगे बढने वाली इस लडकी को कुछ साल पहले कोइ नही जानता था पर जब आतंकवादी इसे अपने सामने नही झुका सके तो इसे जान से मारने की कोशिस की जिससे ये बहोत बुरी घायल हो गई इस सनसनी ने पूरी दुनियॉ मे तहलका मचा दिया की कैसे छोटी उम्र मे इस लडकी ने अपने कलम की ताकत से आतंकवाद को चुनौती दी।

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मलाला युसुफजई का जन्म 12 जुलाई 1997 को पाकिस्तान के एक छोटे से इलाके मे हुआ था। जब मलाला पाकीस्तानी स्वात जिले के मिगोरा शहर मे अपने परीवार के साथ रहती थी  तब तालीबानियो ने मिंगोरा पर कब्जा कर लिया था जो की स्वात जिले का मुख्य शहर माना जाता है मलाला की उम्र उस समय लगभग 11साल थी और इतनी कम उम्र से ही मलाला को डायरी लिखने का शौक था । क्योकी मिंगोरा पर तालीबानीयो का साया था उन्होने अपनी सत्ता बनाये रखने के लिये उस समय कई तरह के फरमान जारी किये हुये थे

इन फरमानो के अनुसार वहॉ की लडकियो को पढने का अधिकार नही था, खेलने का अखिकार नही था और टी.वी तक देखने का अधिकार नही थी ये सब अधिकार उनसे छीन लिये गये थे इनकी अलावा भी कई तरह की पाबंदियॉ लगाई गई। इन फरमानो के बाद तालीबान के डर से लडकियो ने स्कूल जाना बंद कर दिया पर मालाला को ये सब मंजूर ना था तालीबानियो को जवाब देने के लिये उसने कलम का सहारा लिया और Internet पर एक ब्लॉग डायरी लिखना शुरु किया इस ब्लॉग मे उसने लडकियो पर हो रहे अत्याचारो को लिखा और तालीबानियो का चेहरा दुनियॉ को सामने रखने की कोशिस की।

जब मलाला ने Internet ब्लॉग लिखना शुरु किया तो उसे कई तरह की धमकियॉ मिली और इस तरह के प्रयासो को बंद करने के चेतावनी दी गई पर मलाला ने ब्लाग डायरी लिखना बंद नही किया। तब तालीबानियो ने 2009 मे धमकी दी की 15 जनवरी से कोइ लडकी स्कूल नही आयेगी अगर किसी ने ये फरमान नही माना तो वो अपनी मौत का जिम्मेदार खुद होगा। मलाला की डायरी चर्चा मे आने लगी तो तालिबानियो ने उसका स्कूल बिल्डिन्ग गिरा दिया जिससे मलाला को बहोत ठेस पहुची क्योकी मलाला को स्कूल जाना अच्छा लगता था वह पढकर एक डॉ. बनना चाहती थी । डायरी लिखने की शौकीन मलाला ने अपने स्कूल के आखरी दिनो मे डायरी पर लिखा था,

  ‘आज हमारे स्कूल का आखिरी दिन था इसलिए हम सब ने मैदान पर कुछ ज्‍यादा देर खेलने का फ़ैसला किया है। मेरा मानना है एक दिन ये स्कूल खुलेगा पर जाते समय मैंने स्कूल की इमारत को इस तरह देखा की जैसे मैं यहां फिर कभी नहीं आऊंगी।’

सन 2009 मे मलाला को बीबीसी उर्दू सेवा मे लिखने का मौका मिला उसमे मलाला ने अपने और वहॉ के लोगो पर हो रहे अत्याचारो पर लिखा की कैसे लडकियॉ शिक्षा से दूर हो रहीं है तालीबानियो ने उनके स्कूल बंद करा दिये है इसके अलावॉ भी मलाला ने लिखा की इन फरमानो के कारण मुझे मेरा पसंदीदा indian serial का शो राजा की आयेगी बारात  भी देखने को नही मिलता । इन लेखो को लिखने के बाद मलाला स्वात की नायिका बनकर उभरने लगे। मलाला ने लोगो के अंदर उम्मीद की एक किरण जगाई जिससे लोग दुबारा उठ सके।

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2009 के बाद जब स्वात मे आतंक कम हुआ तो लोगो को मलाला को जानने का मौका मिला और उसकी ख्याती बढने लगी। मलाला के कारनामो को लेकर न्युयोर्क टाइम्स ने एक फिल्म भी बनाई जिस फिल्म को देखकर मलाला रो पडी। मलाला के इस फिल्म को कई लोगो ने सराहा और इस बहादुरी के लिये पुरुस्कार भी दिये गये।

तालिबानियो के धमकाने के बाद भी जब उन्हे कोइ फर्क नही दिखा तो उन्होने मलाला को ही अपने रास्ते से हटाने को सोचा इसलिये जब एक दिन मलाला अपने साथियो के साथ स्कूल से लौट रही थी तो रास्ते पर ही दो आतंकियो ने बस को रोककर मलाला पर गोलियॉ दाग दी जिसमे उसकी दोस्त भी घायल हो गई। मलाला को मिलिट्री हॉस्पिटल लाया गया क्योकी एक गोली उसके सिर मे जा घुसी थी इसलिये उसके बचने की उम्मीद बहोत कम थी। सर्जरी के बाद मे आंगे के इलाज के लिये डॉ. की सलाह से उसे ब्रिटेन लाया गया जहॉ डॉक्टरो ने कोशिसो के बाद उसे बचा लिया।

कई दिनो बेहोश रहने के बाद मलाला की ऑखे खुली तो उन्होने उनकी जान बचाने के लिये भगवान को धन्यबाद कहा। इतने बुरे हादसे से गुजरने के बाद भी उनका साहस कम नही हुआ इसके बाद भी उन्होने शिक्षा का प्रोत्साहन किया।

मलाला को अब तक कई पुरस्कारो से नवाजा गया है जिनमे है नोबेल पुरस्कार, राष्ट्रीय युवा शांती पुरस्कार, ह्युमन राइट पुरस्कार, मैक्सिको मे समानता का पुरस्कार।

नोबेल पुरस्कार

मलाला को 10 दिसंबर 2014 के दिन नार्वे के एक कार्यक्रम मे नोबेल का पुरस्कार दिया गया था। मलाला को जब यह पुरस्कार दिया गया तब उनकी उम्र 17 साल थी इस तरह वे नोबेल पुरस्कार पाने वाली दुनियॉ की सबसे कम की विजेता बन गयी है। जब उन्हे ये सम्मान दिया गया तो वहॉ उपस्थित सभी लोगो ने खडे होकर उनका मान बढाया। मलाला के साथ भारतीय समाजसेवी कैलाश सत्यार्थी को भी शांती के लिये नोबेल पुरस्कार दिया गया था।

पाकिस्तान का राष्ट्रीय युवा शांति पुरस्कार – 2011

मलाला को पाकिस्तान की तरफ से उनका पहला पुरस्कार (राष्ट्रीय युवा शांती पुरस्कार) 19 दिसंबर 2011 को मिला। ये पुरस्कार उन्हे साहसी और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र का मानव अधिकार पुरस्कार (ह्यूमन राइट अवॉर्ड 2013)

संयुक्त राष्ट्र ने मलाला  को 2013 मे मानव अधिकार सम्मान (ह्यूमन राइट अवॉर्ड) देने की घोषणा की। यह पुरस्कार मानव अधिकार के क्षेत्र में विशेस कार्य के लिये पांच साल के अंतराल मे दिया जाता है। यह सम्मान पाने वालों में नेल्सन मंडेला, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर शामिल हैं।

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